मेरे पंधरा साल के भाई ने मुझसे पुछा
दिदि जोश क्या होता है???
मैनें कंहा ,
जिस लगनसे तु पुछ रहा हैंना
शायद ऊसेंही केहते है जोश
जोश जो आत्मासे ह्दयमें
ह्दयसें खूंन मै ,
और ऊस खूंनसे अपनी
नसो रगौ मै दौडता हैं
वो हैं जोश............
आंज दांने-दांने के लिये मरनेवाले
सिर्फ साँसें बाकि है फिरभि
बिना लाचार बने
जि रहे है ना ताकदसें
ऊसें केंहते है जोश.............
अज्ञांन का अंधकार दूर करने जो
गरिबिंके तुफानोंसे लढतें हैं
तकदिर की ठोंकरोंसे झगडतें हैं
गिरतें हैं,संभलते है
फिरभी आगें निकलतें हैं
ऊसें केंहते है जोश............
सामनें वालें कें पांस हैं
बंदुके हजार ऊसके पास
सिर्फ एक तलवार
झेंले जों वारों पे वार
फिरभिं न मांने ऊनसें हार
लढकर झुंजकर दे बलिदान
एक विजय जों करे साकार
अपनें देश कि सिमा रखें बरकरार
इस चिंज को जोश केहंते हैं...........
समाज मैं हो कितनेभि अन्याय
ऊसपर हो कितनेभि अत्याचार
नहीं जो होति कभी लाचार
जिं जानसें झुंजती है सबसें
संभालती है जो सारा संसार
वोही एक 'नांर'
शायद इसे जोश केहते हैं.............
वंदे मांतरम का नारा सिना तानें केहतें हो
और कोइ बोलें देश को बुरा तो ऊसका मुंह तोडतें हो
अन्याय,अत्याचार,भ्रष्टाचार और गरिबि केप्रति
होतें है जो अंशन ओर सत्याग्रह
और कमा लेते हो अपना अधिकार
विकास और रक्षा के लियें
छोडें जिन्होने अपने घरदार
मेरा भारत महान की एक ललकार
इसें जोश केहतें हैं..........................
जिस चिज से हम है बरकरार,मौत है हजार जगाह पास अपनें
फिरभी जितेहे,जागते हैं,जगाते हैं
देते है खुदको यहि यकिन बार बार
"हालतें हो कुचभि मगर तुझे शेर कि तरहा बस जिना है मेरे यार"
इसे जोश केहते हैं..........................
आये कोइ मुसिबत तो कर ऊसे पार
जा ,उठ,रह खडा और कर अपने सपने साकार
इस शक्ति को जोश केहते हैं....................
सच कहुं मेरे भाई,
"सामने चल रहा हो कुचभी मगर
ना खोना अपनी लगन और अपना होश"
इसेही केहते हैं जोश
इसेही केहते हैं जोश.......
-मानसी देवधर.
Good start. Keep going.
ReplyDeleteThank you...:)
Deleteअप्रतिम! खूप छान! :)
ReplyDeleteधन्यवाद
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