Tuesday, 10 September 2013

Bapu.....

आपने कहा था "बुरा देखो मत,बुरा सुनो मत और बुरा बोलो मत"
आजके जमानेमे अगर जिना हैं मुझे आपकी इन सुचनाओंका पालन करते तो
सच बताउं बापू ..........
24 घंटे कान,आँख और मुंह पर पट्टी बांधके ही घुमना पडेगा...
अपसोस है बापू पर आपके जाने के बाद बहोत बदलसा गया है सबकुछ....
बापू आज हमेंभी थोडा बदलना पडेगा......

आँखोसे अच्छा देखें तो भला कब...????
दिखाईं देती है .....
गरिबी ......खानें पिनें के लिये लाचारी और
उन गरीबोंके छातीपर बैठै बहोत पैसे वाले भिखारी...
आँखोसे देखतें हैं तो सिर्फ "अन्याय"
और आँखोमे पट्टी बांधे बेचा जानेवाला न्याय ......
दिन बदीन बढते जाते हुये अत्याचार ........
और लाखो हजारो सडी,दबी भरी हुयी नजरे हजार
यही देखतें हैं.......
बलात्कार और हत्यायें और इन सबमें जलनेवाली सेंकडो मासुम चितायें...
देंखते है ....
आम आदमी का सुंखाँ चेहरा
बाल बच्चो का भुखाँ चेहरा
बेहन बच्चीओंका रूखा चेहरा
ओर ये सब देंखने के बाद......
आयनेंमे अपनेंही आँखोमे
आये वो पानीके बूंद.......
यही देंखते है....

सुनते है तो आक्रोश.....
कहीं भुखमै कही दुखमें
कही धुपमें कही आगमें
तो कहीं  बम्ब के धमाकोमे जलनेवालोकें
आजकल तिलकारीया; नही मुझें रोनेके आवाज ज्यादा आतें हैं..
वो आँवाजेभी सुंनाई देती है..दिलकें रोनेकी....

इस वजाहसेंही सोचतीहुं ये सब तमाशा देखें मूंह से अच्छा बोलनें के
काबील ना रहूं मैं......
इसलीये बांधलुं पट्टी आँख,कान और मुंहपर ताकी
सुन,देख बोल ना सकू.......

पर ये सब देंखे सुने खुन खौल उठता है,साँसे चढ जाती हैं
बापु आज वक्त पट्टीया बंधवानेका नहीं हटानेका हैं....
खुल्ले नंगें आँखोसे कानोसें सब सुन-देंखनेका हैं....
और मुंह से इन सब चिजोंका मुंहतोंड जवाब देके प्रतिकार करने का हैं
ताकी हमें कभी जरुरत ही ना पट्टीयोंकी......
वरना ....
हम बैठे रहेंगे मुंह,कान और आँखोपे हात लियें झंबुरे के तरहा....
और ये दुनीयाँ  नचाती रहेगी हमे उसकेही तालपर......

आज बदलना पडेंगा बापूं,आज बदलना पडेंगा......
कल कें रामराज्य कें लियें.....
आज एकबार कुछ नयें फैसले....और फिर बुलंद हौसले..
आज एकबार कुछ नयें फैसले ...और फिर बुलंद हौसले..
                                                                        -मानसी  देवधर.
                                                                      12th arts fergusson.